Monday, November 9, 2020

महाराष्ट्र व अर्नब केस में केंद्र तुरन्त दखल से लोकतंत्र की रक्षा करे ---आर के पाण्डेय एडवोकेट।


---पालघर, सुशांत, कंगना रानावत,अर्नब जैसी घटना शर्मनाक व निंदनीय।

---केंद्र की चुप्पी लोकतंत्र के लिए आत्मघाती।

नैनी, प्रयागराज, 08 नवम्बर 2020। वरिष्ठ समाजसेवी अधिवक्ता आर के पाण्डेय ने लोकतंत्र की रक्षा हेतु भारतीय केंद्र सरकार से तत्काल महाराष्ट्र व अर्नब केस में दखल देने की मांग की है।

   जानकारी के अनुसार पीएम मोदी, गृहमंत्री व राष्ट्रपति को भेजे अपने मांग के अनुसार आर के पाण्डेय एडवोकेट ने कहा है कि पालघर वीभत्स सन्त हत्याकांड, सुशांत केस, कंगना रानावत व अर्नब केस में महाराष्ट्र सरकार की तानाशाही व महाराष्ट्र पुलिस तथा बीएमसी का बर्बर रवैया सामने आ चुका है। जिस देश में आतंकी कसाब जैसों को विधिक व लोकतांत्रिक प्रक्रिया की सुविधा दी गई हो वहां पालघर, सुशांत, कंगना व अर्नब जैसे केस में महाराष्ट्र सरकार, महाराष्ट्र पुलिस व बीएमसी की तानाशाही निश्चित तौर पर लोकतंत्र की हत्या है।  जिसकी रक्षा करना केंद्र सरकार की जवाबदेही है। आर के पाण्डेय ने कहा कि वर्तमान हालात पर केंद्र की चुप्पी आत्मघाती कदम होगा। सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी के बाद केंद्र का सामने आना अनिवार्य हो गया है। 

उन्होंने यह भी कहा कि महाराष्ट्र सरकार व उसकी पुलिस तथा बीएमसी के वर्तमान अलोकतांत्रिक हालात में देश के जागरूक नागरिक बेहद आक्रोशित हैं व केंद्र की चुप्पी पर नाराज हैं। यदि केंद्र ने ऐक्शन न लिया तो आगे चलकर मोदी सरकार को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। आर के पाण्डेय एडवोकेट का विचार है कि विधिक प्रक्रिया का अनुपालन होना चाहिए परन्तु किसी को जानबूझकर प्रताड़ित करना निश्चित तौर पर शर्मनाक व निंदनीय है।

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