Sunday, November 22, 2020

मिशन शक्ति की सफलता पर प्रधान पतियों का ग्रहण


---कागजी के बजाय असली ग्राम प्रधान जनता के बीच जाएं।

---ग्राम सभा की खुली बैठक हो।

प्रयागराज, 22 नवम्बर 2020। प्रधान पतियों को मिशन शक्ति के लिए कलंक बताते हुए वरिष्ठ समाजसेवी आर के पाण्डेय एडवोकेट ने चुने गए प्रधान को ही जनता के बीच जाने व ग्राम सभा की नियमित खुली बैठक की अनिवार्यता को आवश्यक बताया है।

आज मीडिया से वार्ता में पीडब्ल्यूएस प्रमुख आर के पाण्डेय एडवोकेट ने पूछा कि जब सीता, गार्गी, अहिल्या, रानी लक्ष्मीबाई, इंदिरागांधी, कल्पना चावला आदि महिलाएं बिना महिला आरक्षण, बिना मिशन शक्ति व बिना नारी सशक्तीकरण के स्वयं का नाम धार्मिक ग्रन्थों व इतिहास में अमर कर सकती हैं। तो 73 वर्षों के आजादी के बाद आज मिशन शक्ति की जरूरत ही क्या है ? उन्होंने कहा कि वास्तव में आज की राजनीति ही महिलाओं के लिए समस्या है न कि समाज। 

जब एक महिला के नाम पर ग्राम प्रधान व सदस्य का चुनाव जीता जा सकता है। तो उस असली महिला ग्राम प्रधान के बजाय प्रधान पति अपनी असली महिला ग्राम प्रधान को पर्दे में रखकर कार्य क्यों करता है। उन्होंने प्रधान पतियों को ही व्यवस्था का कलंक बताते हुए, ऐसे प्रधान पतियों पर कठोरतम दण्डात्मक कार्यवाही को आवश्यक बताया जोकि अपनी पत्नी के नाम पर चुनाव जीतकर राजनैतिक व आर्थिक लाभ उठाते हैं। आर के पाण्डेय ने जनता का आह्वान किया कि वे अपने क्षेत्र के कागजी के बजाय असली ग्राम प्रधान व सदस्यों को सामने लाने की मुहिम चलाएं तथा ग्राम सभाओं की नियमित खुली बैठक कराकर उनका आन लाइन वीडियो चलाएं। जिससे न सिर्फ जागरूकता आएगी वरन लोकतंत्र का असली मकसद भी जनता को पता चलेगा।

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