Sunday, November 22, 2020

भ्रष्टाचार का दूसरा नाम बना बाल विकास परियोजना

ब्लॉक के अधिकारी जिले पर भारी


----नियम विरुद्ध आंगनबाड़ी की नियुक्ति।

---पौष्टिक आहार वितरण में भारी घोटाला।

---सुदूर जिलों में रहकर कागज पर काम।



विक्रमजोत, बस्ती, 19 नवम्बर 2020। क्या एक आंगनबाड़ी कार्यकत्री, सुपरवाइजर व सीडीपीओ इतने सशक्त हो सकते हैं कि उनके आगे जिले व प्रदेश के अधिकारी नतमस्तक हो सकते हैं ? फिलहाल बस्ती जनपद के विक्रमजोत ब्लॉक में तो इसका उत्तर सीधे हाँ में ही है।

बता दें कि विक्रमजोत ब्लॉक के रामनगर आंगनबाड़ी केंद्र पर तैनात एक आंगनबाड़ी कार्यकत्री सुमनलता पाण्डेय जोकि गोंडा जनपद के छपिया क्षेत्र में दूसरी शादी करके भा0 द0 स0 की धारा 494 का मुकदमा फैजाबाद में लड़ रही है व अपने पहले पति से आई0पी0सी की धारा 498ए, 323, 504, 506 व डी0 पी0 की धारा 3/4 का भी मुकदमा लड़ रही है तथा नियुक्ति वाले केंद्र के क्षेत्र के ग्राम प्रधान खुद इसके माता-पिता रहे हैं तथा नियुक्ति के समय इस आंगनबाड़ी कार्यकत्री द्वारा इन सारे तथ्यों को छिपाकर नियुक्ति ली गई। रहस्यमयी परिस्थित तो यह बन गई कि दो शादियों के मध्य उतपन्न इसके दो बच्चों के वास्तविक पिता की जानकारी के लिए विभाग से इनके डीएनए टेस्ट की मांग की गई है। उधर शिकायतकर्ता का यह भी आरोप है कि गोंडा जनपद की यह महिला बस्ती जनपद में आंगनबाड़ी कार्यकत्री बनकर तीसरे जनपद अयोध्या में रहती है व ड्यूटी केवल कागज पर जारी है। यह सब धूमधड़ाके से इसलिये चल रहा है क्योंकि इसे अपने दूर के रिश्तेदार व अयोध्या में ही निवास कर रही सीडीपीओ लक्ष्मी पाण्डेय व सुपरवाइजर कुमुद सिंह का संरक्षण प्राप्त है।

जानकारी के अनुसार सीडीपीओ लक्ष्मी पाण्डेय की नियुक्ति मात्र संविदा पर भदोही जनपद में हुई थी परंतु उपलब्ध जीओ के विरुद्ध किस आधार पर इनका स्थानांतरण बस्ती जनपद के परशुरामपुर व कालांतर में विक्रमजोत ब्लॉक में हुआ यह भी किसी रहस्य से कम नही है। सीडीपीओ पर यह भी आरोप है कि वह अधिकांशतः अयोध्या में रहते हुए मोबाइल से ही ड्यूटी करती हैं।

इन सबके बीच एक और चौंकाने वाला तथ्य यह भी सामने आया है कि बाल विकास परियोजना विक्रमजोत के सुपरवाइजर कुमुद सिंह द्वारा सीडीपीओ लक्ष्मी पाण्डेय से मिलीभगत करके ड्राई राशन व पौष्टिक आहार वितरण में भारी घोटाला करते हुए तमाम आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के साथ भेदभाव किया जाता है जिसका एक उदाहरण यह भी है कि चार गांव वाले आंगनबाड़ी केंद्र के सैकड़ों लाभार्थियों के मध्य केवल  तीस से चालीस पैकेट ड्राई राशन जबकि मात्र एक गांव वाले आँगनबाड़ी केंद्र पर साठ से नब्बे पैकेट पौष्टिक आहार दिया जाता है। गोपनीयता की शर्त पर कई आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने संवाददाता को बताया कि उन्हें एक बार मिलने वाले पौष्टिक आहार को तीन बार लिखित में दिखाना पड़ता है जबकि इसी सुपरवाइजर व सीडीपीओ द्वारा प्रति बच्चे व लाभार्थी के फीडिंग के लिए धन उगाही तक की जाती है।

इन सबके बीच सबसे बड़ा चौंकाने वाला तथ्य भी सामने आया  है कि आखिर किस भय से ग्रसित इसी विभाग के जिला व प्रदेश के अधिकारी इस रामनगर की आंगनबाड़ी कार्यकत्री सुमनलता पाण्डेय, विक्रमजोत की सुपरवाइजर कुमुद सिंह व सीडीपीओ लक्ष्मी पाण्डेय के आगे नतमस्तक हैं ? हालात तो इतने बदतर हैं कि इस विभाग के जिला कार्यालय व ब्लॉक कार्यालय द्वारा आरटीआई का कोई जवाब भी नही दिया जाता व न ही शिकायतों पर कोई कार्यवाही ही होती है।

उधर इन्ही प्रकरण पर बात करने पर समाजसेवी अधिवक्ता आर के पाण्डेयका ने बताया है खुद उन्होंने भी विगत एक वर्ष में अनेकों शिकायतें करके उपरोक्त तीनो आरोपियों के लाई डिटेक्टर टेस्ट कराने, इनके सीडीआर उपलब्ध कराने तथा रामनगर के आंगनबाड़ी कार्यकत्री व उसके दोनो बच्चों के डीएनए टेस्ट की मांग सहित पूरे प्रकरण की उच्चवह स्तरीय जांच व विधिक कार्यवाही की मांग की है। हाई कोर्ट इलाहाबाद के अधिवक्ता आर के पाण्डेय का कहना है कि आकण्ठ तक भ्रष्टाचार में डूबे इस आंगनबाड़ी कार्यकत्री, सुपरवाइजर व सीडीपीओ को बचाने में इनका विभाग इतना मशगूल हो गया है कि वह भारतीय संसद से पारित व पूरे देश में लागू आरटीआई ऐक्ट,2005 को मानता ही नही अतएव इस प्रकरण से जुड़े सभी अधिकारियों के विरुद्ध कठोरतम कार्यवाही प्रशासन व सरकार द्वारा किये जाने की अपेक्षा है। भ्रष्टाचारमुक्त भारत अभियान चला रहे पीडब्ल्यूएस प्रमुख आर के पाण्डेय एडवोकेट का कहना है कि विभाग को विक्रमजोत ब्लॉक के सभी आंगनबाड़ी, मिनी आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों, सहायिकाओं, सुपरवाइजर व सीडीपीओ के मोबाइल नम्बर को जीपीएस से अटैच करके सीधे प्रदेश कार्यालय की निगरानी में रखा जाए जिससे इन सबकी वास्तविक उपस्थिति का पता चल सके तथा वास्तविकता का खुलासा हो सके।

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