Friday, October 30, 2020

हाजीपुर विधानसभा की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत : मनीष कुमार सिंह |


हाजीपुर लोकसभा हो या विधानसभा क्षेत्र, इसमें लोकतंत्र के लिए कोई जगह इसलिए 45 एवं 20 सालों में नहीं बची है। एकाधिकार एक परिवार का एक व्यक्ति का होने के कारण हाजीपुर का विकास पूर्णरूपेण अवरुद्ध हो चुका है। यहां के राजनेताओं ने अपने परिवारिक अस्तित्व को बनाने के लिए सारी प्रकार की कुरीतियों की स्थापना कर दी। 1977 से हाजीपुर लोकसभा सीट आरक्षण का शिकार है और लगभग 90% समय तक रामविलास पासवान हाजीपुर से सांसद रहे। और रामविलास पासवान लगातार 1977 से लेकर 8 अक्टूबर 2020 तक केंद्र में मंत्री रहे। लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है कि हाजीपुर लोकसभा जिस बात के लिए आरक्षित की गई थी। उसे अब धरातल पर कहीं महसूस भी नहीं कर सकते। रामविलास पासवान ने जिस तरीके से संकीर्ण मानसिकता का परिचय दिया। वह भारत ही नहीं दुनिया के इतिहास में सुनहरे पन्नों पर लिखा जाएगा। जिस व्यक्ति को लोकतंत्र की धरती ने वैशाली ने अपना बच्चा समझकर व बनाकर दुनिया के सर्वोच्च अधिकार दिया, लेकिन रामविलास पासवान ने उन सभी अधिकारों सामानों की तिलांजलि देते हुए सिर्फ और सिर्फ अपने परिवार तक ही सीमित रहें। जिसका परिणाम है कि आज रामविलास पासवान की मृत्यु के बाद भी उनकी दूसरी पत्नी से जो पुत्र प्राप्त है, चिराग पासवान उन्होंने लोकतंत्र की सभी मर्यादा को और लोकतांत्रिक बना दिया और हाजीपुर लोकसभा क्षेत्र में किसी ऐसे दलित चेहरे को आगे नहीं आने देना चाह रहे हैं, जो आने वाले भविष्य में यानी कि 2024 के चुनाव में उनके पुश्तैनी लोकतांत्रिक लोकसभा का सीट हाजीपुर का उत्तराधिकारी बन जाए।

वही आप देखेंगे कि 2020 विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के कब्जे वाली सीट जो कि 2000 से उनके हाथों में है। पुनः भारतीय जनता पार्टी के इस चुनाव में भी चला गया है। लेकिन इस सीट को एक मजाक बनाकर रख दिया गया है। आपको जानकर आश्चर्य होगा या आप खुद भी जानते हैं की हाजीपुर सीट पूर्व विधायक वर्तमान गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय की मानसिकता की जागीर है। नित्यानंद राय 2020 चुनाव से पहले वर्ष 2000 से लेकर 2014 तक जब लोकसभा चुनाव उजियारपुर से जीतकर संसद पहुंच गए, तब जाकर अपने मुंशी को अपनी ताकत के बल पर हाजीपुर का विधायक बना दिया। यह जानकर बड़ा आश्चर्य होगा कि लगभग 6 सालों से अवधेश सिंह हाजीपुर के विधायक हैं। वही अवधेश सिंह अपने विधायक फंड का प्रयोग खुद के स्वविवेक से नहीं कर सकते। तो हम एक ऐसे कठपुतली को विधायक बना कर क्यों रखें जो अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने में असक्षम है।

कुछ दिन पहले मुझे भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता से पता चला कि मुझे भले ही टिकट ना मिला हो, लेकिन अवधेश सिंह जैसे साधारण व्यक्ति को जो अपने मेहनत के बल पर अपना जीवन यापन करता था। वह नित्यानंद राय के चंगुल में फंसकर अपने जीवन लीला ही खत्म कर ली। उन्होंने बताया कि हम लोग अपने जीवन में आगे बहुत कुछ हासिल कर पाएंगे जो वाकई सुखद होगा। लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि अवधेश सिंह जैसे विधायक जिसे किसी भी प्रकार से कोई ज्ञान नहीं है और मात्र भक्ति में लीन खोकर पूर्व विधायक नित्यानंद राय की गुलामी करता है वह हाजीपुर का भला क्या करेंगा। भाजपा के वरिष्ठ नेता ने आगे कहा कि हमें मुक्ति क्या मिले मुक्ति तो अवधेश को इस जंगलराज से मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि बेचारा है वह उसे अब जीवन जीने का अधिकार नहीं है। वह अपनी जिंदगी को इस तरीके से नरक में धकेल दिया है कि जहां से अब बाहर निकल पाना ही अवधेश सिंह के लिए नामुमकिन जैसा है। हाजीपुर की जनता जो लोकतंत्र में अपने आस्था और विश्वास के साथ मानव को उसके जीवन का सर्वोच्च स्थान देती है। उस जनता को इस बार विचार करना होगा। हम ऐसे गुलाम मानसिकता वाले विधायक की जगह एक स्वतंत्र रूप से लोकतंत्र को जीवित रखने वाले लोग वही अपना विधायक बनाये। लोकतंत्र की स्थापना * हाजीपुर वैशाली में हो इसके लिए आवश्यक है कि आज की मतदाता संभल कर वोट करें। नहीं तो आने वाले समय में आपके परिवार और बच्चे सड़कों पर भी नजर नहीं आएंगे। हाजीपुर विधानसभा सीट पर लगातार भारतीय जनता पार्टी का 20 सालों से कब जाने का आ जाए। जिसकी हद यहां तक है कि पूर्व विधायक नित्यानंद राय से लोग डरते हैं। आखिर यह बात मुझे पिछले 7 सालों में समझ में नहीं आई एक विधायक और एक जनप्रतिनिधि से आम लोगों को डरने की जरूरत क्यों है ? इसलिए मतदान करते समय स्वतंत्र विचारधारा वाले विधायक का चुनाव ही भारतीय लोकतंत्र के लिए और मात्री भूमि लोकतंत्र के लिए जो हमारी वैशाली है, उसके लिए निष्पक्षता के साथ लोकतांत्रिक विधायक को आत्मनिर्भर बनाने में मदद करें। 

2020 विधानसभा चुनाव में बदलाव की गूंज सीधे तौर पर देखी जा सकती है। अब वह हाजीपुर नहीं रहा जो किसी गुंडे और अपराधियों से डरे। गत वर्ष में देखा गया था कि हाजीपुर शहर में एवं वैशाली जिले में दिन में दो, तीन, चार,पांच तक रोज हत्या हो जाती थी फिर भी यहां के लोगों ने उसका विरोध किया। वर्ष 2019 में हाजीपुर शहर के महत्वपूर्ण चेहरे खत्म हो गया। जो लोगों के सुख दुख में हमेशा खड़े हुआ करते थे। लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि हाजीपुर के वर्तमान विधायक और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जो पूर्व में विधायक रहे हैं कभी आवाज नहीं उठाई। साथ ही साथ यह भी जान लेगी हाजीपुर में जो कि बिहार के अंदर और भारत के क्षेत्राधिकार में आता है इसके सत्ता भोगी नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में काम करती है। और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वही हैं जो लॉक डाउन के नाम पर पूरे बिहारियों को सड़कों पे मरने के लिए छोड़ दिया। बिहारियों पर लाठी-डंडों से अत्याचार करवाएं। बिहारी माताओं को प्रसव की पीड़ा सड़कों पर उठानी पड़ी। बच्चों को हजारों हजार किलोमीटर पैदल यात्रा करते हुए अपनी आंखों के सामने माता पिता को लाठी और डंडों से पीटते हुए देख। बूढ़े मां बाप को कंधों पर लेकर हजारों किलोमीटर उनके बच्चे आए। बिहारियों का जो अपमान भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया वह शायद इस युग में पूरी दुनिया में मानवता के लिए शर्मसार कर देने वाली घटना कभी नहीं हुई होगी। इसलिए वक्त रहते लोकतंत्र की धरती वैशाली अपने मतदान से पहले और मतदान करते समय इस बात का ध्यान रखें कि हम एक लोकतांत्रिक सरकार चाहिए भले ही किसी पार्टी का ना हो। लोकतंत्र की स्थापना के लिए दल दल की राजनीति से निकलकर किसी सुयोग्य उम्मीदवार चाहे वह निर्दलीय ही क्यों ना हो उसकी तरफ मुखातिब हो 

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