Sunday, September 6, 2020

गुप्तेश्वर पाण्डेय के कार्यकाल में लड़कियां आखिर सुरक्षित क्यों नहीं ?

 गुप्तेश्वर पाण्डेय के कार्यकाल में लड़कियां आखिर सुरक्षित क्यों नहीं ?

कैसी पुलिसिंग व्यवस्था है कि 7 नकाबपोश अपराधी चारदीवारी फांद कर एक व्यवसाई के घर में घुस जाते हैं और लाखों की लूट करने के साथ ही साथ उनकी बच्ची को उठाकर ले जाते हैं सबको याद होगा कि आपको कोरोना काल चल रहा है यह वही दौर है जब भारत के प्रधानमंत्री से लेकर गली कूचे में पुलिस की गाड़ियां आपके मास्क और आपके आने जाने पर लगाम लगाने में पूरी ताकत झोंक दी। कानून का पालन कराना किसे कहते हैं, पिछले 6 महीनों में लोगों ने देखा है लेकिन जो आज हुआ उससे पुलिस की जो नौटंकी है वह भी सामने आ जाती है की पुलिस की भूमिका सिर्फ आम आदमी को डराने धमकाने और अवैध वसूली के लिए जगह-जगह पर बार्केटिंग लगाकर धौंस जमाया जाता हैं

मुजफ्फरपुर 15 साल की बच्ची का अपहरण


ऐसा क्यों हो रहा है कि जहां-जहां गुप्तेश्वर पांडे जो आज वर्तमान में बिहार के पुलिस महानिदेशक हैं। उनके कदम पड़ते हैं और वहां महिला और बच्चियां और असुरक्षित हो जाती हैं। पूरे बिहार ही नहीं पूरी दुनिया को पता चल चुका है कि वर्ष 2012 में जब नवरूणा चक्रवर्ती मुजफ्फरपुर बिहार का अपरहण हुआ और जब उसकी हत्या हुई, तो मुजफ्फरपुर के पुलिस महा निरीक्षक के पद पर गुप्तेश्वर पांडे ही थे। आखिर ऐसी कौन सी पुलिसिंग व्यवस्था गुप्तेश्वर पांडे के नेतृत्व में चल रहा है कि बिहार की बच्चियां लगातार यहां असुरक्षित होती जा रही हैं। फिर भी बिहार की पुलिस का नेतृत्व गुप्तेश्वर पांडे के हाथों में चल रहा है। लगातार हो रहे अपराध और अपराधों में बढ़ती हुई महिलाओं और बच्चियों पर अत्याचार यह शर्मसार कर देने वाली घटना है। जिस पर किसी भी प्रकार से लगाम लगाने में या कहें बच्चियों को सुरक्षा देने में बिहार सरकार के पुलिस महानिदेशक गुप्तेश्वर पांडे लगातार असफल हैं। आखिर किस आधार पर गुप्तेश्वर पांडे को पुलिस व्यवस्था का नेतृत्व दिया गया है और लगातार उन पर भरोसा कर बच्चियों एवं महिलाओं के साथ असुरक्षा की खेल बिहार सरकार खेलती रहेगी।

गुप्तेश्वर पण्डे बिहार पुलिस


यह कौन सा जंगलराज है ? 

यह लालू प्रसाद यादव वाली जंगलराज है या नीतीश कुमार वाली जंगलराज बन गई है या कहें कि नरेंद्र मोदी के द्वारा संचालित राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का यह नया तरीका है ? क्या देश के गृह मंत्री को क्या भारत के प्रधानमंत्री को इतनी फुर्सत नहीं है कि लगातार बिहार में हो रही बच्चियों के साथ हत्या बलात्कार महिलाओं के साथ छेड़खानी चरम पर फिर भी उन्हीं पुलिस महकमे पर भरोसा किया जा रहा है। जिनके कार्यकाल में दर्जनों एवं असंग घटनाएं हुई हैं बिहार की पुलिस प्रशासन की बागडोर त्वरित कार्रवाई करते हुए, गुप्तेश्वर पांडे के हाथों से ले लेना चाहिए। क्योंकि वही गुप्तेश्वर पांडे हैं कि 2012 में नवरुणा चक्रवर्ती की हत्या कांड का निष्पादन नहीं कर पाए और आज भी नवरुणा चक्रवर्ती का केस सीबीआई के हाथों में है और सीबीआई एक राजनीतिक खेल खेलते हुए अपने शाख और प्रतिष्ठा को खत्म कर चुकी है ।

बिहार की पुलिस प्रशासन की बागडोर त्वरित कार्रवाई करते हुए गुप्तेश्वर पांडे के हाथों से ले लेना चाहिए

जाति, धर्म के आधार पर चल रही, राजनीति की ऐसी विषाद पूरे भारत में फैला दी गई है कि अब किसी की सुरक्षा या किसी का व्यक्तित्व और सरकार के भरोसे पर आप उम्मीद भी नहीं रख सकते। भारत की सरकार हो या किसी भी राज्यों की सरकारों अब उनकी जिम्मेवारी सिर्फ सरकार बनाने और सरकार गिराने में नज़र आती ही रह गई है। उन्हें किसी प्रकार का संविधानिक जिम्मेवारी और ना ही संवैधानिक सुरक्षा, संवैधनिक न्याय प्रणाली में भरोसा है। अगर ऐसी प्रणाली में अगर सरकार की भरोसा बढ़ती जा रही है, जिसमें संविधान के लिए कहीं जगह नहीं है, तो भारत को पुनः सोचना पड़ेगा कि क्या यह वाकई में संविधान कैसा है ? जिसके तहत हमें भारत की कल्पना जो आजाद भारत में की गई थी। वह आज हमें धरातल पर दिख रही है।

नौटंकी मास्टर गुप्तेश्वर पण्डे

यह बड़ा ही दुखद घटना है। जब एक घर में डकैती के साथ उस घर की सबसे छोटी बेटी को अपराधी उठाकर ले जाते हैं और मुजफ्फरपुर पुलिस नपुंसक बन कर आज तक एक मूकदर्शक बनी हुई है। बहुत ही दुर्भाग्य की बात है कि जिस मुजफ्फरपुर शहर को स्मार्ट सिटी के रूप में भारत के प्रधानमंत्री ने बनाने का सपना दिखाया था, वह शहर बलात्कारियों और अपराधियों का अड्डा बन चुका है। ऐसी पुलिसिंग व्यवस्था की की गई है अब जिस पर भरोसा कर कोई भी व्यक्ति दो कदम आगे नहीं बढ़ सकता है, तो आओ सब मिलकर यह सुनिश्चित करें, क्या उस बच्ची को पुलिस रिकवर करने में सफलता पाएगी ? क्या हुआ पुलिस उस बच्ची के साथ किसी भी प्रकार की घटना दुर्घटना ना हो उसकी गारंटी दे पाएगी ?

मुजफ्फरपुर से 15 साल की बच्ची का अपहरण के बाद अब तक बच्ची का पता नहीं
 
आखिर किस आधार पर मुजफ्फरपुर में इतनी बड़ी पुलिस फोर्स की स्थापना की गई है। जहां पुलिस महकमे का प्रमुख पुलिस पदाधिकारी, अधिकारी बैठते हैं। लगभग चौथे दिन हुई मुजफ्फरपुर पुलिस आम आदमी की आंखों में धूल झोंकते हुए ही नजर आ रही हैं। मुजफ्फरपुर पुलिस अपराध कि चरम बिंदुओं को पार करते हुए लगातार देखी जा रही है। मुजफ्फरपुर पुलिस का अगर एक दशक का रिकॉर्ड निकाला जाए तो यह महसूस होगा या यह पता चल जाएगा कि अपराध और अपराधियों के लिए यह कितना सुरक्षित जगह है। जिसमें कितने ही पुलिस पदाधिकारी, राजनेताओं की मिलीभगत भी सामने आएगी। लेकिन जिस तरीके से भारत सरकार और राज्य के सरकारी काम कर रही हैं नहीं लगता है सैकड़ों दर्जनों बच्ची के साथ अपराध हो जाने के बाद भी कोई ठोस कदम उठाने का काम करेगी। बालिका गृह से लेकर डकैती में भी पुलिस की भूमिका सिर्फ और सिर्फ संदेहास्पद ही हैं।

सैकड़ों दर्जनों बच्ची के साथ अपराध हो जाने के बाद भी कोई ठोस कदम उठाने का काम करेगी


आज इस विषय को लेकर जो कि मुजफ्फरपुर में गुरुवार को ही थी सदर थाना प्रभारी से मेरी बातचीत हुई, तो थानाध्यक्ष ने बताया की अनुसंधान चल रहा है। मेरा सवाल उनसे था कि आप ने जनता को 48 घंटे का समय दिया था लेकिन वह समय आपका पूरा हो चुका है। तो थाना प्रभारी सदर मुजफ्फरपुर ने कहा की जनता क्या बोलती है ? उससे मुझे कोई मतलब नहीं है ? ऐसा कोई वादा हमने नहीं किया है।

वहीं इसी संबंध में जब अनुमंडल पुलिस अधीक्षक से बात हुई उन्होंने भी कहा कि हम लोग अपने पूरी शक्ति लगा रहे हैं और अनुसंधान कर रहे हैं। कितनी सफलता मिलेगी, इसके बारे में अभी मैं कुछ भी नहीं कर सकता हूं। लेकिन जब मैंने सवाल उठाया कि आपने 48 घंटे का समय दिया था। अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी मुजफ्फरपुर ने कहा यह संभव नहीं होता है। हम अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहे हैं और जैसे ही कुछ होगा तो हम सब को बता देंगे ?

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