Wednesday, September 9, 2020

मुझे माफ़ करें, मैं बिहार चलाने लायक नहीं ? यही कहना हैं गुप्तेश्वर पाण्डेय

 मुझे माफ़ करें, मैं बिहार चलाने लायक नहीं ? यही कहना हैं गुप्तेश्वर पाण्डेय


बिहार पुलिस की जो भूमिका हो चुकी है और जो नेतृत्व इसे मिला है, अब ऐसी ही परिस्थिति में नजर आता है कि मुझे माफ कर दीजिए हमसे ना हो पाएगा ? कमोबेश यही कहते हुए या समझाते हुए नजर आते हैं बिहार के पुलिस महानिदेशक गुप्तेश्वर पांडे। लगातार अब देखेंगे कि बिहार में गुप्तेश्वर पांडे के डीजीपी बनते हैं, उनके अंदर बड़े बदलाव देखे गए। गुप्तेश्वर पांडे को लगातार आप देखेंगे कि मीडिया की सुर्ख़ियो में रहने का नशा छा गया है। किसी ना किसी बहाने वह टेलीविजन पर आने का और पेपरों में छपने का बहाना ढूंढते हैं। गुप्तेश्वर पांडे को देख रहे होंगे कि कभी पुलिस की हुई मारपीट पर पुलिस के सम्मान में खड़े हो जाने वाले आज पुलिस की गरिमा को खत्म करने की तरफ कदम बढ़ाते जा रहे हैं।

बिहार पुलिस की जो भूमिका हो चुकी है और जो नेतृत्व इसे मिला है अब ऐसी ही परिस्थिति में नजर आता है कि मुझे माफ कर दीजिए हमसे ना हो पाएगा।

अक्सर आप देखते हैं कि गुप्तेश्वर पांडे जैसे ही उत्तर प्रदेश में पुलिस और विकास दुबे का मुठभेड़ हुआ 56 इंच का सीना लेकर ताबड़तोड़ भाषणों का अंबार खड़ा कर दिया था। वही रिया चक्रवर्ती पर दिन रात एक कर बोलते जा रहे हैं वही सुशांत सिंह राजपूत को न्याय दिलाने के लिए बेचैनी में दिखते हैं। जोकि उनके क्षेत्राधिकार से बाहर की चीजें हैं। उनके क्षेत्र में होने वाली घटनाओं के लिए गुप्तेश्वर पांडे को। मैं लगातार 8 साल से देख रहा हूं आदमी जिम्मेवार नहीं है । फिर भी बिहार सरकार ने किस आधार पर गुप्तेश्वर पांडे पर भरोसा रखो और बिहार के पुलिस विभाग के सर्वोच्च पदों पर बैठा दिया। जबकि गुप्तेश्वर पांडे ने तब भी जिम्मेदारी नहीं ली थी जब वह मुजफ्फरपुर के आईजी थे वर्ष 2012 - 13। 

गुप्तेश्वर पांडे ने आज तक यह नहीं बताया कि मुजफ्फरपुर की नवरुणा चक्रवर्ती की हत्या किसने की गुप्तेश्वर पांडे ने कभी नहीं बताया कि मुजफ्फरपुर में समीर की हत्या किसने की गुप्तेश्वर पांडे ने कभी नहीं बताया वैशाली जिला में लगातार हो रही हत्याओं पर किसकी भूमिका है गुप्तेश्वर पांडे नया कभी नहीं बताया कि पटना में दिनदहाड़े हत्या होती है और उसके पीछे उनकी क्या मंशा है गुप्तेश्वर पांडे यह कभी नहीं बताएं बिहार के पुलिस महानिदेशक यानी डीजीपी होने के बावजूद अपनी जिम्मेदारियों को वह भली भांति निभा नहीं पा रहे हैं तो उनके साथ क्या होना चाहिए गुप्तेश्वर पांडे कभी नहीं बताया बिहार के डीजीपी में हूं और मैं सक्षम हूं अपनी जिम्मेदारियों को निभाने में असक्षम हैं लेकिन मैं मुंबई में हो रही घटनाओं पर और उत्तर प्रदेश में होने वाली घटनाओं पर भाषण देने के लिए मैं फेसबुक पर तांडव मचा दूंगा

जब गुप्तेश्वर पांडे डीजीपी बने, बिहार को तो ऐसा महसूस उन्होंने कराया कि जैसे अपराध और अपराधियों के साथ शक्ति के साथ पेश आएंगे। लेकिन उनके काम करने के तरीके सिर्फ और सिर्फ राजनीतिक ही नजर आते हैं। गुप्तेश्वर पांडे का रिकॉर्ड यही कहता है कि वह अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा को पूरा करने के लिए किसी भी हद तक गिर सकते हैं। गुप्तेश्वर पांडे अपना कैरियर एक बार दांव पर लगाकर चुनाव में आने की तैयारी किए, फिर अचानक चुनाव में ना जान पाने के कारण वह पुनः प्रशासनिक पद पर आकर बैठ गए। और फिर से उनके रिटायरमेंट के समय में बिहार विधानसभा चुनाव का आगाज है और उसकी तैयारी के लिए वह दिन-रात सुशांत सिंह राजपूत और रिया चक्रवर्ती की चर्चाओं में व्यस्त रहते हैं।

बिहार सरकार ने किस आधार पर गुप्तेश्वर पांडे पर भरोसा रखो और बिहार के पुलिस विभाग के सर्वोच्च पदों पर बैठा दिया। जबकि गुप्तेश्वर पांडे ने तब भी जिम्मेदारी नहीं ली थी जब वह मुजफ्फरपुर के आईजी थे वर्ष 2012 - 13।


गुप्तेश्वर पांडे ने आज तक यह नहीं बताया कि मुजफ्फरपुर की नवरुणा चक्रवर्ती की हत्या किसने की ?

गुप्तेश्वर पांडे ने कभी नहीं बताया कि मुजफ्फरपुर में समीर की हत्या किसने की ? 

गुप्तेश्वर पांडे ने कभी नहीं बताया वैशाली जिला में लगातार हो रही हत्याओं पर किसकी भूमिका है ?

गुप्तेश्वर पांडे नया कभी नहीं बताया कि पटना में दिनदहाड़े हत्या होती है और उसके पीछे उनकी क्या मंशा है ?

गुप्तेश्वर पांडे यह कभी नहीं बताएं बिहार के पुलिस महानिदेशक यानी डीजीपी होने के बावजूद अपनी जिम्मेदारियों को वह भली भांति निभा नहीं पा रहे हैं तो उनके साथ क्या होना चाहिए ?

गुप्तेश्वर पांडे कभी नहीं बताया बिहार के डीजीपी के रूप में हूं और मैं असक्षम हूं ?

गुप्तेश्वर पांडे अपनी जिम्मेदारियों को निभाने में असक्षम हैं,  लेकिन मैं मुंबई में हो रही घटनाओं पर और उत्तर प्रदेश में होने वाली घटनाओं पर भाषण देने के लिए मैं फेसबुक पर तांडव मचा देते हैं ?

गुप्तेश्वर पांडे आज इसी मुद्रा में नजर आ रहे हैं, अब भाई मुझे माफ करो, हमसे ना हो पाएगा ?

गुप्तेश्वर पांडे आज इसी मुद्रा में नजर आ रहे हैं, अब भाई मुझे माफ करो, हमसे ना हो पाएगा ? जिस तरीके से जनता ने अपराधियों को हमारे जैसे पुलिस प्रशासन के संरक्षण के माध्यम से सांसदों में पहुंचाया है, सदनों में पहुंचाया है।  वैसे ही मुझे भी सदन का रास्ता प्रशस्त कर दें । गुप्तेश्वर पांडे अब किसी भी स्थिति में सदन में जाना चाहते हैं और सदन में जाने वाली हर वह प्रक्रियाओं कर देना चाहते हैं। जिसके लिए वह अपनी जिम्मेदारियों को जो पुलिस महानिदेशक के रूप में बैठ कर के नहीं कर पा रहे हैं। उसी को लेकर उन्हीं कमियों को लेकर वह सिर्फ गुमराह करने की परिस्थिति में आकर बैठे हैं । वाकई में अब जनता को विचार करना चाहिए, कि गुप्तेश्वर पांडे को जैसो से सदनों में भरमार कर दिया हैं । राजनीतिक दलों की गुलामी में जनता ने ही बलात्कारियों को, अपराधियों को, जमीन माफियाओं को, वैसे ही पुलिस महानिदेशक जो गैर जिम्मेदाराना हरकतों के लिए भारत की पुलिसिंग व्यवस्था में याद किए जाएंगे, उन्हें भी उन बलात्कारियों के साथ बैठने का सौभाग्य अब जनता को दे देना चाहिए

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